रायगढ़ की लामीदरहा पंचायत में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप, 10 बिंदुओं पर जांच की मांग
रायगढ़। जनपद पंचायत रायगढ़ के अंतर्गत ग्राम पंचायत लामीदरहा में पूर्व सरपंच के कार्यकाल से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर शिकायत सामने आई है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत रायगढ़ को दिए गए आवेदन में पंचायत के विभिन्न कार्यों और मदों में राशि के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए दस्तावेज, बिल, कार्यस्थल की तस्वीरों और बैंक खातों की जांच कराने की मांग की गई है।
शिकायत में कुल 8 लाख 98 हजार 663 रुपये की राशि से संबंधित कथित अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
मनरेगा मजदूरों के भुगतान में गड़बड़ी का आरोप
शिकायत के अनुसार मनरेगा के तहत एक कार्य के लिए 2.40 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे। आरोप है कि वास्तविक रूप से काम करने वाले मजदूरों को सामूहिक रूप से करीब 55 हजार रुपये का ही भुगतान किया गया, जबकि शेष राशि को पूर्व सरपंच और सचिव द्वारा कथित तौर पर अपने करीबियों एवं परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में स्थानांतरित किया गया।
आवेदन में कहा गया है कि ग्रामीणों की शिकायत के बाद जांच दल का गठन हुआ था। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि जांच के दौरान पूर्व सरपंच और उनके पति ने वित्तीय गड़बड़ी स्वीकार की थी। वहीं, शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि जांच रिपोर्ट तैयार करते समय संबंधित बैंक खातों का विस्तृत मिलान नहीं किया गया।
फर्नीचर खरीदी और स्कूलों के भुगतान पर भी सवाल
शिकायत में पंचायत के लिए फर्नीचर खरीदी के नाम पर किए गए भुगतान को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि रिकॉर्ड में भुगतान दर्शाया गया, लेकिन मौके पर अपेक्षित मात्रा में फर्नीचर उपलब्ध नहीं मिला।
इसी तरह 15वें वित्त आयोग की राशि से लामीदरहा और आमापाली के प्राथमिक स्कूलों में फर्नीचर एवं अन्य कार्यों के नाम पर भुगतान किए जाने का उल्लेख है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि दोनों स्कूलों में संबंधित मद से ऐसा कोई काम या फर्नीचर खरीदी नहीं हुई। आवेदन में स्कूल के प्रधान पाठकों और स्टाफ से इसकी पुष्टि कराए जाने की मांग की गई है।
योग दिवस और बैनर के नाम पर खर्च का आरोप
शिकायत में योग दिवस कार्यक्रम के लिए 50 हजार रुपये खर्च दिखाए जाने पर भी सवाल उठाया गया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कार्यक्रम के नाम पर राशि खर्च होने का मौके पर पर्याप्त प्रमाण नहीं है।
इसके अलावा फ्लेक्स-बैनर लगाने के नाम पर 40 हजार रुपये के भुगतान का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया है कि पंचायत के पूर्व कार्यकाल में इतने बड़े स्तर पर फ्लेक्स नहीं लगाए गए थे।
चबूतरा निर्माण और पंचायत भवन की राशि पर भी आपत्ति
शिकायत में गौण खनिज मद से 94 हजार रुपये चबूतरा निर्माण के नाम पर आहरित किए जाने का आरोप है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि मौके पर ऐसा चबूतरा निर्मित नहीं हुआ, जबकि उसी स्थान पर डीएमएफ मद से स्वीकृत राशि से निर्माण कार्य कराया गया।
पंचायत भवन से संबंधित करीब 1.96 लाख रुपये के भुगतान को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आवेदन में कहा गया है कि नियमानुसार मनरेगा से स्वीकृत राशि मिलने के बाद पहले से खर्च की गई राशि को अन्य विकास कार्यों में लगाया जाना था अथवा पंचायत मद में वापस जमा किया जाना था।
खेल सामग्री और कंप्यूटर खरीदी पर भी सवाल
शिकायत में खेल महोत्सव के दौरान खिलाड़ियों के लिए मेडल एवं स्मृति चिन्ह खरीदने के नाम पर 70 हजार रुपये के भुगतान का भी उल्लेख है। आरोप है कि संबंधित सामग्री वास्तव में राजीव युवा मितान क्लब की ओर से उपलब्ध कराई गई थी।
इसी तरह पंचायत के लिए कंप्यूटर और प्रिंटर खरीदने के नाम पर 58,300 रुपये के भुगतान का उल्लेख करते हुए शिकायतकर्ताओं ने दावा किया है कि पंचायत में संबंधित उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए और भुगतान के लिए कथित रूप से फर्जी बिल का इस्तेमाल किया गया।
गौठान के लिए ट्रैक्टर आवंटन का भी मामला
शिकायत में गोठान में विकास कार्यों के संचालन के लिए शासन द्वारा ट्रैक्टर आवंटित किए जाने का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया है कि पंचायत को मौके पर ऐसा कोई ट्रैक्टर प्राप्त नहीं हुआ। इसके बावजूद योजना से संबंधित राशि या वाहन के नाम पर भुगतान/व्यय किए जाने की बात कही गई है।
इसके अलावा एक अन्य भुगतान में शारदा मिनरल्स के नाम से करीब 2 हजार रुपये की राशि दिए जाने का उल्लेख है। शिकायतकर्ताओं ने संबंधित कार्य का मौके पर प्रमाण नहीं मिलने का दावा करते हुए इसकी भी जांच कराने की मांग की है।
दस्तावेज और बैंक खातों की जांच की मांग
शिकायतकर्ताओं ने जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से मांग की है कि सभी आरोपित बिंदुओं की दस्तावेजों, बिल-वाउचर, बैंक खातों, कार्यस्थलों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर जांच कराई जाए। साथ ही वर्तमान पंच, पूर्व पंच और ग्रामीणों की मौजूदगी में मौके का सत्यापन कराने का अनुरोध किया गया है।
शिकायत में कहा गया है कि पूर्व में संबंधित राशि और पंचायत के बकाया भुगतान को लेकर भी मामला उठाया गया था। अब शिकायतकर्ता चाहते हैं कि जांच पूरी होने तक संबंधित मामलों में भुगतान पर रोक रखते हुए कथित वित्तीय अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए।
फिलहाल दस्तावेज में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। जांच रिपोर्ट और संबंधित विभाग के रिकॉर्ड के आधार पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किन भुगतानों में वास्तव में अनियमितता हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।










